डीजीपी जावीद अहमद भी 'मित्र' फार्मूले पर चलने के लिए पुलिस में कोई ऊर्जा नहीं भर पाए। सिविल लाइन थाने में मानवाधिकार की खुलेआम धज्जियां उड़ी। बेरहम पुलिस का क्रूर चेहरा सामने आया। मामूली मारपीट के आरोपी को फट्टे से तब तक पीटा गया, जब तक उसे हाथों से खून नहीं निकला। बाद में मारपीट की धाराओं में युवक को जेल भेज दिया है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जेल चुंगी के समीप नित्यानंद परिवार के साथ रहते है। नित्यानंद हाल ही पुलिस के हेडमोहर्रिर पद से रिटायर हुए हैं। नित्यानंद ने थाने में पहुंचकर शिकायत की। आरोप था कि उनका बेटा मोनू अक्सर मां-बाप के साथ कहासुनी करता है। तत्काल ही पुलिस की जीप गई और मोनू को उठाकर थाने ले आई। यहां तक तो पुलिस की कार्रवाई शायद सही चल रही थी। इसके बाद मोनू को एक शातिर अपराधी की तरह हवालात में डाल दिया। उसके बाद मोनू को हवालात से बाहर इंस्पेक्टर के ऑफिस में बुलाया, जहां पर एसएसआइ और दारोगा मौजूद थे। दारोगा ने फट्टे से मोनू को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। मोनू हाथ जोड़कर चिल्लाता रहा कि उसने मम्मी पापा के साथ मामूली कहासुनी की थी। उनका परिवारिक मामला है। जब मोनू हाथ जोड़ते हुए जमीन पर लेट गया तब दारोगा ने फट्टा नीचे रखा। धारा 151 में मोनू को जेल भी भेज दिया।
इन्होंने कहा..
मोनू मां-बाप के साथ मारपीट करता था। इंसानियत के नाते उसे इस प्रकार की सजा दी गई है। भविष्य में वह मां-बाप को परेशान न करे। इसलिए उसे ऐसी सजा दी गई।
- राजीव सक्सेना, एसएसआइ
पुलिस का कार्य है कि कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई का पालन करे। मोनू ने मारपीट की है, तो उसे पकड़कर जेल भेजने तक सही है। उसके साथ थाने में पिटाई क्यों की गई? इसकी जांच कराकर संबंधित दारोगा के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-जे रविंदर गौड़, एसएसपी

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