एक ओर प्रशासन जनपद के तालाबों को दबंगो के कब्जे से मुक्त कराए जाने की कवायद में एड़ी चोटी का जोर लगाए है, वहीं दूसरी ओर राजनैतिक दलों के नेताओं पर ही तालाबों पर कब्जे के आरोप लग रहे हैं। ऐसा ही एक आरोप बसपा के पूर्व विधायक के भाई पर लगा है। नेशनल हाइवे पर पाबली स्थित नीलकंठ इंस्टीट्यूट के निर्माण पर सवाल खड़ा करते हुए सामाजिक संस्था सारथी ने इस इंस्टीट्यूट को निर्माण तालाब के स्थान पर किए जाने का आरोप लगाया है। संस्था की अध्यक्षा ने बुधवार को संस्था के सदस्यों के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए इस इंस्टीट्यूट की जांच कराए जाने की मांग उठाई है। अगर संस्था के आरोप सही पाए जाते हैं तो इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग पर तो गाज गिरना तय ही है, संचालकों के खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही की जा सकती है।
सारथी संस्था की अध्यक्षा कल्पना पांडे और सचिव अशोक शर्मा के नेतृत्व में बुधवार को संस्था के दर्जनों सदस्यों ने कलक्टे्रट पर प्रदर्शन करते हुए डीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। कल्पना पांडे ने बताया कि सरधना तहसील के अंतर्गत पावली खास गांव में नीलकंठ कॉलेज इंस्टीट्यूट की स्थापना तालाब पर कब्जा करके की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि संचालक ब्रजवीर सिंह के भाई चंद्रवीर बसपा से सरधना सीट के विधायक रह चुके हैं, इसलिए उनके राजनैतिक रसूख के चलते तालाब पर कब्जे के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने जिले के सभी 1012 तालाबों को चिन्हित कराते हुए उन्हें फिर से गुलजार किए जाने की बात कही है।
इसी क्रम में जिन तालाबों पर दबंगो द्वारा कब्जा किया गया है, उन्हें कब्जा मुक्त कराए जाने की कवायद भी जारी है। ऐसे हालात में इस तालाब को भी कब्जा मुक्त कराए जाने अति आवश्यक है। ज्ञापन सौंपने वालों में दुर्गेश पांडे, सुमन शुक्ला, मनोहर, सूरजपाल, प्रमोद, मनोज जोशी आदि मौजूद रहे। वहीं इस मामले में जानकारी के लिए इंस्टीट्यूट संचालक ब्रजवीर सिंह के मोबाइल पर सम्पर्क का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव करते ही काट दी।

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