वाहन चोरी कर उनके फर्जी दस्तावेज बनाने वाला गिरोह अब पुलिस से भी ज्यादा चालाक हो गया है। पुलिस को चकमा देने के लिए गिरोह ने इस बार आरटीओ में ही सेंधमारी कर दी है। ऐसे वीआइपी नंबर जो अभी आवंटित भी नहीं हुए, उन नंबरों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर चोरी के वाहन सड़कों पर बेधड़क दौड़ाए जा रहे हैं और पुलिस को इसकी भनक भी नहीं लग पाई। मेडिकल पुलिस ने चोरी की बाइक समेत एक युवक को दबोचा तो इस सनसनीखेज खेल का खुलासा हुआ।
मेडिकल पुलिस को सरायकाजी निवासी युवक के पास चोरी की बाइक होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने अतुल सागर पुत्र सुनील सागर को हिरासत में ले लिया। सुनील रोडवेज में कर्मचारी है। पुलिस ने अतुल के कब्जे से एक यामाहा एफजेडएस बाइक बरामद की, जिसका नंबर यूपी-15 4747 है। पुलिस ने छानबीन की और इंटरनेट पर इस नंबर की जानकारी खोजी गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। जब आरटीओ में संपर्क किया गया तो खुलासा हुआ कि ये नंबर तो वीआइपी श्रेणी का है और किसी को आवंटित ही नहीं किया गया। ऐसे में साफ हो गया कि बाइक चोरी की है और उस पर ऐसा नंबर डाला गया है, जो अभी तक आवंटित ही नहीं हुआ। पुलिस सूत्रों की मानें तो अतुल ऐसे गिरोह से जुड़ा है, जो ऐसे नंबरों के दस्तावेज बनाता है, जो अभी किसी को आवंटित ही नहीं हुए। पुलिस ने अतुल के घर पर दबिश भी दी और वहां से कुछ आरसी, प्रिंटर व अन्य सामान भी बरामद किया। अतुल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और बाइक पुलिस ने कब्जे में ली है।
अतुल ने सुनाई नई कहानी
अतुल ने खुद को फंसता देखकर एक कहानी सुनाई। बताया कि हापुड़ निवासी एक युवक 20 हजार रुपये उधार ले गया था और बाइक गिरवी रखकर गया था। उसने कागजात पूरे देखकर बाइक रख ली थी।
बाइक पर लिखा था पुलिस
जिस बाइक को मेडिकल पुलिस ने अतुल के कब्जे से बरामद किया, उस पर पुलिस लिखा हुआ था। जब पूछा गया तो पता चला कि परिवार में कोई पुलिस में नहीं है। अब पुलिस इस संबंध में भी कार्रवाई की तैयारी में है।
आखिर कैसे पता, नंबर नहीं हुआ आवंटित
जो नंबर अभी आरटीओ कार्यालय से किसी वाहन को आवंटित नहीं किया गया, उन नंबरों की जानकारी आखिर बाहर कैसे चली गई? पुलिस ये मानकर चल रही है कि कोई अंदर का आदमी ऐसे गिरोह की मदद करता है। या फिर इस तरह के खेल में दलालों का हाथ हो सकता है, जिनके पास वीआईपी नंबरों की लिस्ट और उनकी फीस का पर्चा होता है। पुलिस इस संबंध में पड़ताल कर रही है।
इन्होंने कहा..
एक बाइक पुलिस ने पकड़ी है, जिस पर डाला गया नंबर अभी आरटीओ से किसी को भी आवंटित नहीं हुआ है। ऐसे में ये संभावना है कि कई अन्य वाहन भी ऐसे हो सकते हैं। पुलिस छानबीन में जुटी है।
बीएस वीरकुमार, सीओ सिविल लाइन।
-वीआइपी नंबरों का डाटा ऑनलाइन होता है और ऑन लाइन ही बुक किए जाते हैं। नंबर सार्वजनिक होते हैं। ऐसा संभव है कि जब कोई नंबर सीरीज अंतिम चरण में होती है तो वाहन चोरी से जुड़े आरोपी इन्हीं नंबरों को अपने चोरी के वाहनों पर डाल लेते हों। पुलिस को चाहिए कि वीआइपी नंबरों की ज्यादा से ज्यादा पड़ताल करे।
-ममता शर्मा, आरटीओ मेरठ।

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