सिविल लाइन पुलिस का क्रूर चेहरा देखकर अफसर भी दंग रह गए। मम्मी-पापा से मामूली झगड़े में बेटे को घर से उठाकर थाने लाने के बाद फट्टों से उसे बुरी तरह पीटा गया। पुलिस की इस हैवानियत पर मानवाधिकार आयोग ने जवाब मांग लिया है। ऐसे में कप्तान ने सीओ सिविल लाइन से फट्टे से पिटाई पर रिपोर्ट मांगी है।
सिविल लाइन थानाक्षेत्र में जेल चुंगी के समीप हेड मोहर्रिर नित्यानंद के बेटे मोनू को सिविल लाइन पुलिस उठाकर ले आई। मोनू का कसूर सिर्फ इतना था कि घर में मम्मी-पापा से झगड़ गया था। मामूली से झगड़े में पुलिस की तुरंत कार्रवाई सवाल खड़ा कर रही है। दरअसल, जिसे पकड़कर लाई थी। वह रिटायर्ड हेड मोहर्रिर का बेटा है। दारोगा ने एसएसआइ के सामने मोनू को फट्टों से पीटा और मोनू जमीन पर लेटकर हाथ जोड़ता रहा। इसके बाद पुलिस ने मोनू को मारपीट की धाराओं में जेल भेज दिया। मामला मीडिया में आया तो मानवाधिकार आयोग ने सिविल लाइन पुलिस के इस कृत्य पर जवाब मांग लिया है, जबकि लगातार अफसर सेमीनार कर पुलिस को मित्र बनाने का दावा कर रहे हैं। तत्काल ही कप्तान जे रविंदर गौड ने पूरे मामले में सीओ सिविल लाइन से रिपोर्ट मांग ली है।
इन्होंने कहा..
सिविल लाइन पुलिस मोनू को किसकी तहरीर पर पकड़कर लाई थी। उसकी फट्टों से पिटाई क्यों की गई। इस पर सीओ सिविल लाइन को जांच के आदेश दिए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई कर दी जाएगी।
जे रविंदर गौड, एसएसपी।

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