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Wednesday, 15 June 2016

पश्चिमी उप्र के इतिहास व संस्कृति की गवाह बनी एक किताब

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व राजनैतिक तौर पर सदा से ही विकसित क्षेत्र रहा है। इसके बावजूद अब तक इसे एक भौगोलिक इकाई के रूप में पहचान नहीं मिल सकी है। अब विद्वानों व जानकारों ने इसे एक पृथक भौगोलिक इकाई मानते हुए शोध व अध्ययन करना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहासकारों ने सफलता का पहला पड़ाव पार कर लिया है। इतिहासकार डा. अमित पाठक, डा. कृष्ण कांत शर्मा व अमित राय जैन ने संयुक्त रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहास व संस्कृति को 'पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इतिहास व संस्कृति' नामक किताब में लिपिबद्ध किया है। इस पुस्तक का विमोचन मंगलवार को नई दिल्ली स्थित पर्यटन भवन में भारत सरकार के पर्यटन व संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने किया।

इस धरोहर की पहली गवाह बनी यह किताब
पश्चिमी प्रदेश की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर की गवाह बनने वाली यह पहली किताब है। इससे पूर्व इस क्षेत्र पर कोई ऐसी किताब नहीं लिखी गई है। यह किताब पश्चिमी क्षेत्र के इतिहास, यहां की धरोहर, ऐतिहासिक इमारतें, सिक्के, पुरातात्विक स्थल, मेले वेशभूषा आदि पर गहन शोध के बाद लिखी गई है।


महान सांस्कृतिक घटना से है नाता
पुस्तक का विमोचन करते हुए डा. शर्मा ने कहा कि पश्चिमी प्रदेश जहां राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण है वहीं सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में भी इसका मुकाबला विश्व स्तर की संस्कृतियों से किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष की दो महान सांस्कृतिक घटनाक्रम, रामायण व महाभारत की संस्कृति से सीधे जुड़ा है यह क्षेत्र।

अंग्रेजी के बाद ¨हदी में भी
डा. अमित पाठक के अनुसार फिलहाल यह पुस्तक अंग्रेजी में है, लेकिन जल्द ही इसका ¨हदी संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा। डा. कृष्ण कांत शर्मा, अमित राय का मानना है कि यह पुस्तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर शोध कार्य करने वाले छात्रों का मार्गदर्शन करेगी।
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