सुशीला जसवंत राय अस्पताल के गार्ड हत्याकांड में गिरफ्तारी न होने पर परिजनों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे संदिग्धों की पुलिस पहचान नहीं कर पायी है। पुलिस की कार्रवाई से मृतक के परिवार के लोग संतुष्ट नहीं हैं। इस मामले को लेकर शुक्रवार दोपहर जंगेठी गांव में पंचायत हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि महापंचायत टलेगी नहीं। किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने महापंचायत को समर्थन देने की बात कही है।
शुक्रवार को मामले में पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा गया कि पुलिस ने संदिग्धों की फुटेज तो निकाल ली, लेकिन अस्पताल में दिन भर कौन आया और कौन गया इसकी फुटेज क्यों नहीं निकाली। रात्रि में किस चौकीदार की ड्यूटी थी, उससे पूछताछ क्यों नहीं की गई। जब डाक्टरों को नामजद कर दिया गया है तो पुलिस ने अभी तक किसी को भी क्यों नहीं उठाया। पंचायत में पुलिस पर आरोप लगाया कि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जा रही। तय हुआ कि महापंचायत को टाला नहीं जाएगा। बैठक में आए किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने महापंचायत में अपना समर्थन देने की बात कही।
गौरतलब है कि 05 जून की सुबह सुशीला जसवंत राय अस्पताल में जंगेठी निवासी गार्ड ब्रजभूषण की निमर्म तरीके से हत्या कर दी गई थी। गार्ड का शव जेनरेटर रूम के पास पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना आया था। सिविल लाइन थाने में अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने जांच शुरू करते हुए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। सामने आया कि शीला गुप्ता के आवास के बाहर तीन संदिग्ध लोग घूम रहे हैं। पुलिस ने अंदेशा जताया कि कहीं संदिग्ध युवक शीला गुप्ता के घर लूट की कोशिश तो नहीं कर रहे थे और गार्ड के विरोध करने पर उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। पुलिस अभी भी इसी बिंदू पर जांच कर रही है और तीनों संदिग्धों के फोटो पब्लिक में जारी कर दिए गए हैं। पुलिस ने पहचान के लिए जनता से मदद मांगी है।
इस मामले में बुधवार को गार्ड के परिजन ऑल इंडिया सैन समाज के अध्यक्ष श्रीनिवास सैन के साथ डीआईजी से मिले और आरोप लगाया था कि जसवंत राय अस्पताल में मानव अंगों की तस्करी की जा रही है, जिसमें अस्पताल संचालक कृष्ण गोयल, शीला गुप्ता, डा. राजीव अग्रवाल, डा. मलय शर्मा व डा. एससी अग्रवाल लिप्त हैं। घटना से पांच दिन पूर्व अस्पताल में एक युवक को अगवा कर लाया गया था, जिसका ऑपरेशन कर किडनी निकाली गई। यह भेद ब्रजभूषण जान गया था। इसी खातिर उसकी हत्या कर दी गई।
घटना को 6 दिन गुजर गए, लेकिन पुलिस ने एक भी नामजद को गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस तीन संदिग्धों की तलाश कर रही है। पुलिस की मानें तो इसमें चिकित्सकों की कोई भूमिका नहीं है। संदिग्धों के पकड़े जाने पर ही केस वर्कआउट होगा, हालांकि पुलिस की इस कार्रवाई से गार्ड के परिजन संतुष्ट नजर नहीं आ रहे।

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