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Friday, 10 June 2016

पंचायती राज के विरोध में उतरे ग्राम विकास परिषद के अधिकारी

पंचायती राज विभाग के हड़ताल पर जाने को लेकर ग्राम विकास परिषद से जुड़े लोग विरोध में उतर आए है, जिसके चलते उन्होंने प्रति दिन दो घंटे कार्य अधिक करने का निर्णय लिया है, साथ ही इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पंचायती राज विभाग को अलग न करने की मांग की है। जिसके चलते शुक्रवार को खण्ड़ विकास कार्यालय सभागार में एक मीटिंग की गई और सुबह एक घंटा समय से पहले आने तथा शाम को एक घंटा ओवर टाइम काम करने का निर्णय लिया गया।

सरधना के खण्ड विकास कार्यालय सभागार में ग्राम विकास परिषद से जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों की एक बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता बीडीओ रेनू चौधरी ने की तथा संचालन ग्राम विकास अधिकारी शशि शर्मा ने किया। पंचायती राज विभाग ने अपने आपको ग्राम विकास परिषद से अलग करने की मांग को लेकर शुक्रवार से हड़ताल पर जाने का निर्णय ले लिया है, जिसके चलते पंचायती राज से जुड़े एडीओ व कर्मचारियों ने अपने कार्यालय पर ताला जड़ दिया है। जिसके बाद ग्राम विकास परिषद इसके विरोध में उतर आया है।

जिसके बाद ग्राम विकास परिषद से जुड़े अधिकारीयों व कर्मचारियों ने इस हड़ताल से सुलटने के लिए प्रति दिन दो घंटे काम अधिक करने का निर्णय लिया है ताकि लोगों की समस्याओं को न बढऩे दिया जाये। इसी के साथ ग्राम विकास महापरिषद ने एक पत्र मुख्य मंत्री को भेजा है। जिसमे पंचायती राज विभाग को अलग न करने की मांग की गई है। पत्र के माध्यम से बताया गया कि खण्ड विकास अधिकारी उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 92 के अनुसार क्षेत्र पंचायत का मुख्य कार्यपालक अधिकारी है और पंचायत की समितियों के संकल्पो को कार्यान्वित कराने के उत्तरदायी हैं।

धारा 52 की उपधारा (4)के उपबांधो के अधीन रहते हुए (क्षेत्र पंचायत) में नियोजन समस्त अधिकारियों तथा सेवकों की सेवा अवकाश वेतन भत्ता तथा अन्य विशेषताओं के सम्बन्ध में उठने वाले प्रश्नों का तधर्भ बनाए गए किन्ही नियमों के अनुसार समाधान करने का अधिकार है। क्षेत्र पंचायत के मुख्य कार्यपालक अधिकारी/खण्ड विकास अधिकारी है, ग्रामीण विकास से जुडी हुई सभी विभागों की विकास योजनाओं का क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत जैसी पंचायतीराज संस्थाओं के माध्यम से गाँव की गरीब जनता को लाभ पहुंचाने हेतु खण्ड विकास अधिकारी पारदर्शी रूप से संचारित करता है। पंचायती राज संस्थाएं एवं पंचायतीराज विभाग दोनों पृथक-प्रथक हैं पंचायतीराज संस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है।


इस उद्देश्य को भटकाने का प्रयास पंचायतीराज विभाग के फिल्ड स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा अपने निहित स्वार्थाे के लिए प्रथक व्यवस्था के रूप में स्थापित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। विकास खण्ड स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी जनपद स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी एवं जिलाधिकारी की व्यवस्था से प्रथक किये जाने का प्रयास किया जा रहा है जिसका उदाहरण शासनादेश संख्या -1/2016 /337 /33 /1/2016/15 दिनाक 4-2-2016 है।

हमारा मूल उद्देश्य शासन स्तर पर कृषि उत्पादन आयुक्त अम्ब्रेला की भाँति निचले पायदान पर तैनात खण्ड विकास अधिकारी की भूमिका को मजबूती प्रदान करने का है न कि उसे कमज़ोर किये जाने का। विकास खण्ड पर खण्ड विकास अधिकारी समन्वयक की भूमिका एवं एवं दायित्व को कमज़ोर किये जाने के किसी भी कुत्सित मंशा को सफलीभूत नहीं होने देगा।

महापरिषद ने यह निर्णय लिया है कि आगामी जून एवं 17 जून 2016 को पंचायतीराज विभाग द्वारा प्रस्तावित धरने /प्रदर्शन को संज्ञान में लेगी और 2 घंटे अतिरिक्त कार्य करेगी। महापरिषद द्वारा प्रदेश सरकार की छवि को धूमिल करने के कुचक्र को सफल नहीं होने दिया जाएगा और प्रदेश में चल रही गरीबी उन्मूलन की एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं को पूरे मनोयोग से संचालित किया जाएगा। जिसको सफल बनाने के लिए ग्राम विकास परिषद से जुड़े अधिकारी कर्मचारी प्रति दिन दो घंटे अधिक कार्य करने को भी तैयार है जिसे पहले ही दिन से अमली जामा भी पहना दिया गया है। इस अवसर पर एडीओ समाज कल्याण राम कुमार शर्मा, सहायक लेखाकार कृष्ण कुमार, डीटी जगदीश सिंह, सहायक लेखाकार उमेश कुमार, ग्राम विकास अधिकारी हितेश कुमार, सुनील कुमार, अरुण कुमार, सतवीर, श्रवण कुमार, अजय गुप्ता आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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