जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने कृषक भाईयों को सूचित करते हुए कहा कि जनपद मेरठ में मृदा में जिंक तत्व की कमी देखी गयी है, जिसके फलस्वरूप पौधे भोजन तैयार नहीं कर पाते। जिस कारण पौधों की बढ़वार रूक जाती है। जिंक की कमी को दूर करने के लिये सरकार द्वारा विकास खण्ड स्तर पर दिनांक 15 जून से 7 जुलाई तक कम्पनियों के स्टाल लगाये जायेंगे, जिसमें कृषि विभाग में पंजीकृत कृषकों को पूर्ण मूल्य पर जिंक सल्फेट का क्रय करना होगा तथा नियमानुसार अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी कृषक के बैंक खाते में भेज दी जायेगी।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जिंक सल्फेट पर 50 प्रतिशत अनुदान दिये जाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत जनपद में संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, बीजीआरईआई व आईसीडीपी योजनाओं के अन्तर्गत जिंक सल्फेट हेप्टाहाईड्रेट 21 प्रतिशत 25 कि0ग्राम प्रति हेक्टेयर एवं जिंक सल्फेट मोनोहाईड्रेट 33 प्रशित 15 कि0ग्राम प्रति हेक्टेयर कृषकों को वितरित किया जायेगा। योजनाओं में जिंक सल्फेट के मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू0 500 प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, की दर से अनुदान अनुमन्य होगा।
अर्थात किसान भाइयों को अधिकतम 1000 रूपये का अनुदान दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि किसान भाईयों को अच्छी गुणवत्ता का जिंक सल्फेट प्राप्त हो सके, इसके लिये विकास खण्ड स्तर पर त्वरित विधि से गुणवत्ता परीक्षण का काउंटर भी लगाया जायेगा, जिससे किसान जिंक सल्फेट की गुणवत्ता का परीक्षण करा सके। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जनपद मेरठ में मैसर्स दयाल फर्टीलाइजर्स (प्रा0) लि0 मेरठ, नन्दी फर्टीलाइजर्स प्रा0 लि0, मेरठ एवं माइक्रोप्लेक्स एग्रो कैमीकल्स एण्ड फर्टीलाइजर्स हापुड़ आपूर्तिकर्ता संस्था द्वारा जिंक सल्फेट का स्टाल लगाकर कृषकों को जिंक सल्फेट का वितरण कराया जायेगा। यह योजना जनपद मेरठ में लक्ष्य होने तक ही लागू होगी, जिसमें प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर अनुदान दिया जायेगा। उन्होंने कृषकों अनुरोध किया कि वह आवश्यकतानुसार भंडारों पर लगाये जाने वाले स्टालों से गुणवत्तायुक्त जिंक सल्सेट का पूर्व से ही क्रय कर योजना का लाभ उठायें एवं फसलों की उत्पादकता में वृद्धि लायें।
0 comments:
Post a Comment