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Sunday, 19 June 2016

दवाईयों में हाइड्रोक्लोराइड बढ़ा रहा लोगों की तखलीफ

रोजमर्रा की जिंदगी में हम जो दवाएं इस्तेमाल कर रहे है वो किसी जहर से कम नहीं है। सिर-दर्द, पेट दर्द से लेकर शुगर तक के लिए खायी जाने वाली दवाओं में बेस कंपोनेंट के तौर पर यूज होने वाला हाइड्रोक्लोराइड लोगों को बीमारियां बांट रहा है।

जहां इन दवाओं का सेवन बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है वही इनका उल्टा असर हो रहा है। ये दवाएं सूजन, घबराहट जोड़ों में दर्द के साथ किडनी और हार्ट फेल जैसी बीमारियां बांट रही है, जिसका कारण इन दवाओं में पडऩे वाला सॉल्ट हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में हाइड्रोक्लोराइड के नाम से जानते है। ये एक अम्ल है जो अधिकतर दवाओं में बेस कंपोनेंट के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस कंपोनेंट पर बेस्ड बहुत सारी दवाएं हम बिना डॉक्टर से बात किए भी खा लेते है। कुछ लोगों को इससे हल्के रिएक्शन और कुछ लोगों पर इसका भारी रिएक्शन भी होता है। मगर ये इंसानी शरीर को बीमारियों के दलदल में फंसा रहा है। विशेषज्ञों का भी ऐसा ही कुछ मानना है।

ये होती हैं दिक्कतें-

हाइड्रोक्लोराइड कंपोनेंट पर बेस्ड कई दवाईयां मार्केट में ईजी अवेलेवल है, जो हाईपर टेंशन, दर्द, वॉमेटिंग, पेट दर्द, शुगर, लूज मोशनए कोल्ड आदि की दवाओं में बेस के तौर पर मौजूद है। अधिकतर लोग कुछ दवाओं को बिना डॉक्टर से कंसल्ट किए भी यूज करते है।
भूख न लगना, चक्कर आना, कब्ज और दस्त, जी घबराना, चीजें धीरे-धीरे धुंधली दिखाई देने लगती है। इसके अलावा और भी साइड इफेक्ट होते है जैसें मसल्स पेन, यूरीन का कलर डार्क हो जाता है, हार्ट बीट्स बढ़ जाती है, प्यास ज्यादा लगना और उल्टी ज्यादा होना, जोड़ों में दर्द और सूजन शरीर में ऐंठन चक्कर आना, स्किन हटने लगती है, सांस फू लना, कमजोरी, स्किन और आंखें पीली हो जाती है, शरीर में झंझनाहट
ठंड लगना, गले में दर्द और बुखार आना, एलर्जिक रिएक्शन में स्किन में रैशेज चेहरे और होठों पर सूजन, सीने में जकडऩ, खुजली और सांस लेने में तकलीफ होती है।

ये है कुछ दवाएं-

ग्लाईफोर, टेट्रासिन, स्पासमेक, मेफ नॉल स्पास, सिप्रोडॉक, डेबिस्टाल, जीएम, ग्लायकोनिल, एम बायोट्राम इंटाजिन, ए एम, मैट्रोक्लोफ ोमाइड, क्रोमैट्राजिन, टिग्लामेटिंग, श्हाइड्रोक्लोराइड बेसिक कंपोनेंट की तरह से दवाओं में इस्तेमाल होता है और ये बहुत कॉमन है। कुछ रिएक्शन भी सामने आए है।
मेडीसीन विशेषज्ञ डा. राजाराम

इनका कहना——-
वार्ड व ओपीडी में इलेक्ट्रॉल की कोई कमी नहीं है। कई बार डॉक्टर की सलाह के बिना भी लोग मरीज बाहर से इलेक्ट्राल खरीद लेते हैं।
– सीएमओ, जिला अस्पताल
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