अक्सर लोग सदियों से चली आ रही परंपराओं या मिथक धारणाओं को सत्य मानकर उन्हीं पर चलते रहते हैं। ये मानसिक अवरोध व्यक्ति के नवाचार पर रोक लगा देते हैं। रोजर बैनिस्टर ब्रिटेन के डॉक्टर थे, लेकिन आज उन्हें पूरा विश्व सर्वश्रेष्ठ धावक सर रोजर बैनिस्टर के रूप में जानता है। उन्होंने एक मानसिक अवरोध को तोड़कर अनेक व्यक्तियों के लिए नए मार्ग खोल दिए हैं। सदियों से लोगों का मानना था कि चार मिनट से कम समय में एक मील दौडऩा किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। इस तरह यह मनोवरोध हर किसी के मन में प्रबल हो गया था कि एक मील दौडऩे के लिए चार मिनट से कम समय नहीं लग सकता। तभी रोजर बैनिस्टर ने अपनी इच्छाशक्ति और सोच से अनेक डॉक्टरों, विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों को गलत साबित करते हुए 1954 में एक मील की यात्रा तीन मिनट 59.4 सेकेंड में पूरी करके विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि चार मिनट का अवरोध टूटते ही दो महीने बाद एक अन्य धावक ने रोजर बैनिस्टर का रिकॉर्ड तोड़ दिया और उसके बाद 37 धावकों ने एक मील की यात्रा को चार मिनट से कम समय में पार कर लिया। ऐसे ही न जाने कितने मानसिक अवरोध हमारे दिमाग में जीवन भर अपनी जगह बनाए रखते हैं और हम उन अवरोधों को तोडऩे का प्रयत्न ही नहीं करते। जो उन अवरोधों व मुसीबतों को पार कर लेते हैं, वे सफल हो जाते हैं।
व्यक्ति जितना स्वयं को अध्यात्म की ओर प्रेरित करता है उतना ही उसके मस्तिष्क में मानसिक अवरोध कम पनपते हैं। आध्यात्मिक व्यक्ति का चित्त शांत रहता है। वह प्रत्येक कठिन और असंभव कार्य को भी सहजता, धैर्य और शांति के साथ करने का प्रयास करता है। व्यक्ति के हृदय और मस्तिष्क में मानसिक अवरोध उस समय पनपते हैं जब वह नकारात्मक भावनाओं के साथ कार्य करता है। मन को स्वच्छ रखने का सबसे सरल उपाय यह है कि इसे ईष्र्या, दुर्भावना, लोभ और बेईमानी को अपने अस्तित्व से दूर रखा जाए। जब व्यक्ति स्वच्छ और सरल हृदय से किसी भी कार्य की तरफ कदम बढ़ाता है, तो वह न सिर्फ शिखर पर पहुंच जाता है बल्कि पूरे विश्व को अचंभित भी कर देता है।

0 comments:
Post a Comment