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Sunday, 12 June 2016

कविताओ का तोहफा : अभिषेख बच्चन

अभिषेख बच्चन अपने दादा-दादी के साथ बिताए बचपन को ख़ास मानते है और कहते हैं कि ‘मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे अपने दादा-दादी के साथ समय बिताने का अवसर काफी मिला | जब मै छोटा था तब दादाजी अपने स्टडी रूम में लिखने में व्यस्त रहते थे | मै अपना ज्यादातर समय दादी माँ के साथ व्यतीत करता था | दादी माँ हमें बहुत लाड-प्यार करती थी | वह हमे मंदिर ले जाती थी | वह हमें मिठाई कि दुकान पर ले जा कर खिलाती-पिलाती थी| दादाजी कि उम्र हो गयी थी तो वह सोने से पहले रात में पिताजी की एक फिल्म देखा करते थे तथा हम भी उनके साथ बैठकर देखा करते थे|


दादाजी कि एक खासियत थी कि जन्मदिन पर हमें एक कविता लिख कर जरुर देते थे | उन्हें मैंने आज भी सहेजकर रखा है | उनके लेखन का गुण मेरी बहन स्वेता में जरुर आया है| वह काफी कुछ लिखती है दादाजी की कविताओ को मैंने डैड से भी सुना है| अच्छा होता कि मै दादाजी के मुख से कविताए सुन पाता | पापा हमें बताते है कि दिल्ली तथा इलाहाबाद में कवी सम्मलेन घरो में हुआ करते थे जिसमे देश के प्रसिद्ध कवी हिस्सा लेते थे| 
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