अभिषेख बच्चन अपने दादा-दादी के साथ बिताए बचपन को ख़ास
मानते है और कहते हैं कि ‘मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे अपने दादा-दादी के साथ समय
बिताने का अवसर काफी मिला | जब मै छोटा था तब दादाजी अपने स्टडी रूम में लिखने में
व्यस्त रहते थे | मै अपना ज्यादातर समय दादी माँ के साथ व्यतीत करता था | दादी माँ
हमें बहुत लाड-प्यार करती थी | वह हमे मंदिर ले जाती थी | वह हमें मिठाई कि दुकान पर
ले जा कर खिलाती-पिलाती थी| दादाजी कि उम्र हो गयी थी तो वह सोने से पहले रात में पिताजी
की एक फिल्म देखा करते थे तथा हम भी उनके साथ बैठकर देखा करते थे|
दादाजी कि एक खासियत थी कि जन्मदिन पर हमें एक कविता लिख कर
जरुर देते थे | उन्हें मैंने आज भी सहेजकर रखा है | उनके लेखन का गुण मेरी बहन स्वेता
में जरुर आया है| वह काफी कुछ लिखती है दादाजी की कविताओ को मैंने डैड से भी सुना
है| अच्छा होता कि मै दादाजी के मुख से कविताए सुन पाता | पापा हमें बताते है कि
दिल्ली तथा इलाहाबाद में कवी सम्मलेन घरो में हुआ करते थे जिसमे देश के प्रसिद्ध
कवी हिस्सा लेते थे|

0 comments:
Post a Comment