भीषण गर्मी के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने व बादल फटने से हो रही भयकंर बरसात से गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढऩे व घटने का क्रम जारी हैै। दो दिन पूर्व जलस्तर में भारी वृद्धि होने से गंगा किनारे तैयार खड़ी धान व गन्ने की फसलों पर संकट मंडराने लगा हैं। गंगा नदी ने तेजी से कटान करना शुरू कर दिया है। जिससें गंगा किनारे बसें दर्जनों गांव पर भी कटान का संकट गहराने लगा हैै। जिससे क्षेत्र के लोग परेशान हैं। मंगलवार को फिर से हरिद्वार से गंगा नदी में 50 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो गया और बिजनौर बैराज से मिली जानकारी के अनुसार आज दोपहर गंगा का जलस्तर मात्र 41 क्यूसेक चल रहा था। यह पानी गंगा के अन्दर ही रहेगा।
दो सप्ताह से तापमान में हो रही वृद्वि और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बरसात से अधिक मात्रा में बर्फ पिघलने लगा है। इससे गंगा नदी का जल स्तर लगातार घट व बढ़ रहा हैं। गंगा जल स्तर में लगातार हो रही वृद्धि से गंगा किनारे बसें ग्रामीणों को बाढ़ का खतरा सहन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को कहना है कि गंगा में इस समय बहुत कम पानी चलता है, लेकिन गंगा के जल स्तर और मौसम में आए दिन हो रहे परिर्वतन से गंगा नदी उफान पर है। कई जगह गंगा नदी का पानी किनारे तोड़कर बाहर आने की कोशिश में है। लगातार गंगा जलस्तर में हो रही बढ़ोत्तरी के कारण गंगा की तलहटी में तैयार खड़ी फसलों को गंगाजल नष्ट कर सकता है।
हेसापुर, परसापुर, सिरजौपुर, पठेलनगर, दूधली, बस्तौरा, बधुवा, खेड़ीकला, मखदूमपुर, मानपुर, फतेहपुर सहित दर्जनभर गांवों में खेती की लगभग 80 फीसदी भूमि में किसानों ने धान, गन्ना, ज्वार आदि की फसलें उगा रखी हैं, जो इस समय अपने पूरे यौवन पर है और किसानों के मन में खुशी लहर थी कि इस बार उनकी फसल अच्छी खड़ी है। इसी बीच गंगा नदी का जल स्तर बढ़ जाने से गंगा का पानी फैलकर उनकी फसलों में घुस गया है। सभी फसलों को तबाह कर दिया है।
किसानों का कहना है उन्होंने गन्ने व धान की फसल के लिए 20 हजार से लेकर पच्चीस हजार रुपए एकड़ खेत को ठेके पर लिया है और कड़ी महनत कर फसलों को तैयार किया है। जब फसलें तैयार होनी शुरू हुई तो गंगा ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। अधिकांश फसल में बारिश और गंगा का पानी भरा है। अगर गंगा का जलस्तर और बढ़ता है तो किसानों की लगभग 80 फीसदी फसल गंगा की गोद में समा जाएगी है। ऐसे में उनके परिवार के आगे भूखे मरने की नौबत आ जाती है।

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